Tuesday, 18 December 2012

कॉलेज का पहला दिन

अब वक्त आ गया था कुछ कर दिखाने का......

अब आ गया था में....... अपने गाँव ..अपने घर अपने परिवार से बहुत दूर...........कुछ मेरे कुछ अपनों के सपनो को पूरा करने............हैं कुछ अरमान मेरे भी हैं कुछ सपने.....छूट गया था बचपन उन गाँव की गलियों में...........जहाँ से अब मेरी मंजिल का सफ़र शुरू होता है.......

कॉलेज का पहला दिन .....सभी अनजान चेहरे , में भी भटक रहा था इधर से उधर....जैसे किसी अपने  चेहरे की तलाश हो .....

सब एक दुसरे को घूर घूर कर देख रहे थे.......और देखते बभी क्यूँ नहीं, एक दुसरे को पहली बार जो देख रहे थे...... 

अनजाने लोग..अजनबी चेहरे ,..दिल बेताब था......नये नये दोस्त बनाने के लिए......और दोस्त भी बन गये.....फिर भी ना जाने क्यों कुछ अच्छा नहीं लग रहा था....फिर भी ना जाने क्यों किसी अपने की तलाश थी.....

ऐसे लग रहा था जैसे किसी नयी दुनिया में कदम रखा हो.........दिल भी कुछ घबराया हुआ  सा था.....

और भी था बहुत कुछ.......

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