Sunday, 5 May 2013

safar ab tak

1..फिर आज उसकी तरफ, निगाह करते हैँ..


लगने दो नमक जख्मोँ पर, थोडा सा आह करते हैँ...

मुद्दतेँ गुजरी की जख्म अब, भरने लगेँ हैँ..

चलो फिर से वही, गुनाह करते हैँ...! 




बदल वो गई है इतनी,कि अब अफताब नहीँ लगती...
मोहोब्बत के दरिया मैँ,किनारे नाव नहीँ लगती...
ये तीरे-नजरेँ खाकर बस,रह गया है दिल....
विरह की धूप मेँ हमको,मिलन की छाँव नहीँ लगती.....!!


2.जख्म दिये हैँ तो फिर,मरहम क्यूँ लगाते हो..

अभी तो होश मैँ आये,अभी फिर क्यूँ पिलाते हो...

मोहोब्बत है नहीँ वैसी,जैसा तुम समझते हो...

निभाना है नहीँ आसाँ,कसमेँ क्यूँ खिलाते हो...!!



3..मुद्दतो बाद दुआयोँ मेँ असर आया है,
तुम चले आये हो या चाँद नजर आया है...!!
4..

जो हमने ना की हो, मोहोब्बत की वो इवादत नहीँ...
किसी भँवरे के फूल को पाने की,हमे चाहत नहीँ...
हम तो एक फूल को टूटकर चाहने वाले भँवरे हैँ....
यूँ हर कली को देखकर, उसकी तरफ उड जाना, हमारी आदत नहीँ...!

5.


आज फिर कहीँ गमोँ की इबादत ना कर लूँ..
तन्हा किया किसी ने इतना,
डरता हूँ तन्हाईयोँ से मोहोब्बत ना कर लूँ....


6.
ख्याब बनकर लो चला मेँ,अब किसी की आँखोँ मैँ....
वो भी सपने बुनती मेरे,अक्सर जागी रातोँ मैँ....
थी मोहोब्बत से शिकायत,जो अब दूर हो गयी....
जो देखी मोहोब्बत की रेखा, अपने हाथो मेँ...!!!


7.
रुक जाते कदम वही,जहाँ तेरे नख्श-ए-कदम देखते हैँ,,
जिस भी आईने मेँ देखते वस, आँखोँ को नम देखते हैँ,,
और इस्से ज्यादा क्या होगी, मेरी मोहोब्बत,,
तुझे नहीँ तेरी परछाई को पाने का,सपना हम देखते हैँ....!!!



8..

हम मोहोब्बत जिसे समझाने निकले..
शहर मेँ उसके हजारो दिवाने निकले...
हम चाहते रहे जिन्हेँ अपनो की तरह....
वही तो वक्त के साथ वैगाने निकले...!!!


9.
मोहोब्बत जिस से होती है,मोहोब्बत उसे होती नहीँ,,
मोहोब्बत जिस से करते हैँ, मोहोब्बत उस से होती नहीँ...!!!!


10.
मोहोब्बत और जमाने की, ये जो तकरार पुरानी है....
कहीँ मँजनु दिवाना है,कहीँ लैला दिवानी है....
गिरा कर एक भी आँसू, गर दोनोँ की आँखोँ से....
मोहोब्बत का वो मोती है, जमाने का वो पानी है....!!




11.
मुझको इल्म ना था, कोई दिल में रहता है...
हकीक़त में नहीं वो कुछ, ख्यावो में कहता है....
मुझे बस इतना पता है,मेरी मोहोब्बत में...
उसकी आँख का आंसू ,मेरी आँख से बहता है......!